*Read More: Why Do I See Halos Around Lights at Night?
“मुझे रात में रोशनी के चारों ओर हेलो/प्रभामंडल क्यों दिखाई देते हैं?” – यदि आप अक्सर खुद से यह सवाल पूछते हैं, तो हमारे पास इसका जवाब है!
कल्पना कीजिए कि आप रात के समय व्यस्त सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं। सामने चल रही गाड़ियों की टेल लाइट्स धुंधली और उनके चारों ओर गोलाकार हेलो दिखाई दे रहे हैं, जिससे रात में ड्राइविंग करना मुश्किल हो जाता है। घबराइए नहीं, दृष्टि में हेलो दिखाई देना एक सामान्य समस्या है, विशेष रूप से बढ़ती उम्र के साथ।
हम समझते हैं कि हेलो दिखाई देना चिंताजनक लग सकता है, लेकिन ऐसे में शांत रहें और जब तक किसी भरोसेमंद नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श न कर लें तथा सही कारण न जान लें, तब तक (यदि संभव हो) रात में वाहन चलाने से बचें।
अब सवाल यह है कि कुछ लोगों को हेलो/प्रभामंडल दिखाई क्यों देते हैं? रात में हेलो दिखाई देने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें रिफ्रैक्टिव एरर (दृष्टि दोष) से लेकर अन्य नेत्र रोग तक शामिल हैं। इस ब्लॉग में हम उन सभी संभावित कारणों के बारे में चर्चा करेंगे जो हेलो का कारण बन सकते हैं।
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Toggleदृष्टि में हेलो/प्रभामंडल दिखाई देने के क्या कारण हैं?
हेलो को समझने से पहले आइए जानें कि हमारी आँखें कैसे काम करती हैं।
आँख की सबसे बाहरी पारदर्शी परत को कॉर्निया (Cornea) कहा जाता है। सामान्यतः इसका आकार बीच में थोड़ा गोल और ढलान वाला होता है। लेकिन कुछ लोगों में यह ढलान अधिक तीव्र हो सकता है या इसका आकार शंकु (Cone) या किसी अन्य अनियमित रूप का हो सकता है। आपके कॉर्निया का आकार इस बात को बहुत प्रभावित करता है कि प्रकाश आपकी आँख में किस प्रकार प्रवेश करता है, जिससे हेलो, धुंधली दृष्टि और अन्य दृश्य विकृतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि ये दृश्य समस्याएँ केवल रात में ही नहीं होतीं। वास्तव में, ये रात के समय या कम रोशनी वाले वातावरण में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
विज़ुअल रिप्रेजेंटेशन: आपकी दृष्टि में हेलो क्यों दिखाई देते हैं
मायोपिया (Myopia) या नज़दीक की दृष्टि (Nearsightedness)
मायोपिया या निकट दृष्टिदोष से पीड़ित लोगों को दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। मायोपिया के कारण रात में देखने में भी कठिनाई हो सकती है। जब आपकी आँखें अंधेरे में स्पष्ट देखने के लिए संघर्ष करती हैं, तो आपकी पुतलियाँ (Pupils) स्वाभाविक रूप से अधिक फैल जाती हैं। जैसे-जैसे पुतलियाँ चौड़ी होती हैं, वैसे-वैसे अधिक परिधीय (Peripheral) प्रकाश आँख में प्रवेश करता है। जब यह अतिरिक्त प्रकाश लेंस के बाहरी हिस्से से होकर गुजरता है, तो हेलो जैसी दृश्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
एस्टिग्मैटिज़्म (Astigmatism) या सिलेंड्रिकल नंबर
एस्टिग्मैटिज़्म कॉर्निया की अनियमित वक्रता (Irregular Curvature) के कारण होता है। कॉर्निया का असामान्य आकार प्रकाश के आँख में प्रवेश करने और फोकस होने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जिससे धुंधली दृष्टि और हेलो दिखाई देने लगते हैं।
एस्टिग्मैटिज़्म वाले लोगों में हेलो/प्रभामंडल के अलावा चमक (Glare), प्रकाश की लकीरें (Streaks), स्टारबर्स्ट (Starbursts) जैसी अन्य दृश्य समस्याएँ भी आम होती हैं।
ड्राई आई सिंड्रोम (Dry Eye Syndrome)
ड्राई आई सिंड्रोम को आमतौर पर आँखों में अधिक पानी आना, किरकिरापन और जलन जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है, लेकिन यह आपकी दृष्टि को भी प्रभावित कर सकता है। यदि आँख की सतह पर्याप्त रूप से नम (Lubricated) नहीं रहती, तो प्रकाश के आँख में प्रवेश करने का तरीका प्रभावित होता है, जिसके कारण हेलो दिखाई दे सकते हैं।
*नोट: ड्राई आई से पीड़ित हर व्यक्ति को हेलो दिखाई दें, यह आवश्यक नहीं है।
मल्टीफोकल लेंस (Multifocal Lenses)
कुछ लोगों को अलग-अलग दूरी पर स्पष्ट देखने के लिए चश्मे या मल्टीफोकल कॉन्टैक्ट लेंस की आवश्यकता होती है। हालांकि ये अधिकांश समय उपयोगी होते हैं, लेकिन कभी-कभी इनमें मौजूद अलग-अलग पावर प्रकाश को विभाजित कर देती हैं, जिससे हेलो जैसा प्रभाव दिखाई दे सकता है।
लेसिक (LASIK) या लेज़र आई सर्जरी
लेसिक (लेज़र-असिस्टेड इन सिटू केराटोमिल्यूसिस) या लेज़र विज़न करेक्शन सर्जरी मायोपिया, हाइपरोपिया और एस्टिग्मैटिज़्म जैसे दृष्टि दोषों को ठीक करके आपको जीवनभर के लिए चश्मे से छुटकारा दिला सकती है। हालांकि, सर्जरी के शुरुआती रिकवरी चरण में कुछ अस्थायी दृश्य समस्याएँ हो सकती हैं।
इनमें सबसे सामान्य हैं – हेलो, प्रकाश की लकीरें (Streaks), चमक (Glare), स्टारबर्स्ट आदि। ये विशेष रूप से रात में अधिक महसूस होती हैं। लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण है कि ये समस्याएँ केवल अस्थायी होती हैं और कॉर्निया पूरी तरह ठीक होने के बाद अपने आप समाप्त हो जाती हैं।
मोतियाबिंद (Cataract)
मोतियाबिंद एक उम्र से संबंधित नेत्र रोग है, जिसमें आँख का प्राकृतिक लेंस कठोर और धुंधला हो जाता है। इस धुंधलेपन के कारण प्रकाश पहले की तरह आँख के भीतर नहीं पहुँच पाता, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है।
मोतियाबिंद का एक और सामान्य लक्षण प्रकाश के प्रति अधिक संवेदनशीलता (Light Sensitivity) है, जिसके कारण हेलो, चमक (Glare) और दोहरी दृष्टि (Double Vision) जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
केराटोकोनस (Keratoconus)
केराटोकोनस भी एस्टिग्मैटिज़्म की तरह कॉर्निया के असामान्य आकार से जुड़ी समस्या है। लेकिन इसमें कॉर्निया धीरे-धीरे पतला होकर शंकु (Cone) के आकार में बाहर की ओर उभरने लगता है।
कॉर्निया का यह असामान्य आकार प्रकाश के आँख में प्रवेश करने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जिसके कारण हेलो और धुंधली या विकृत दृष्टि जैसी समस्याएँ होती हैं।
*नोट: केराटोकोनस समय के साथ लगातार बढ़ता और गंभीर होता जाता है। यदि आपको इसके कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत किसी अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उपचार शुरू करें। उपचार में देरी होने पर यह स्थायी दृष्टि हानि या अंधेपन तक का कारण बन सकता है।
फुच्स डिस्ट्रॉफी (Fuchs’ Dystrophy)
कॉर्निया की सबसे अंदरूनी परत एक पंप की तरह कार्य करती है, जो अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालती है। कुछ मामलों में जब यह पंप सही ढंग से काम करना बंद कर देता है, तो कॉर्निया में सूजन आ जाती है और उसकी सतह पर छोटे-छोटे फफोले या उभार बनने लगते हैं। इस स्थिति को फुच्स डिस्ट्रॉफी (Fuchs’ Dystrophy) कहा जाता है।
यह सूजन प्रकाश के आँख में प्रवेश करने के तरीके को प्रभावित करती है, जिससे हेलो दिखाई देने लगते हैं। इसके अन्य सामान्य लक्षणों में धुंधली दृष्टि, आँखों में जलन, प्रकाश से संवेदनशीलता और आँखों में दर्द शामिल हैं।
नैरो-एंगल ग्लूकोमा (Narrow-Angle Glaucoma)
ग्लूकोमा एक ऐसी नेत्र बीमारी है जिसमें आँख का दबाव (IOP या Intraocular Pressure) असामान्य रूप से बढ़ने के कारण ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुँच सकता है।
ओपन-एंगल ग्लूकोमा इसका अधिक सामान्य प्रकार है। इसमें आँख के भीतर तरल पदार्थ धीरे-धीरे जमा होता है, जिससे समय के साथ आँख का दबाव बढ़ता है।
लेकिन दूसरा प्रकार – नैरो-एंगल ग्लूकोमा अपेक्षाकृत दुर्लभ है। इस स्थिति में पुतलियाँ अचानक फैल जाती हैं, जिससे आँख के ड्रेनेज चैनल बंद हो जाते हैं। परिणामस्वरूप तरल पदार्थ बाहर नहीं निकल पाता और आँख का दबाव तेजी से बढ़ जाता है। नैरो-एंगल ग्लूकोमा अचानक भी हो सकता है।
यदि आपको मतली, हेलो दिखाई देना, उल्टी या आँखों में दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत अपने नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। 40 वर्ष से अधिक आयु के वे लोग जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास हो, जिन्हें मधुमेह हो, जिनकी आँख में पहले चोट लगी हो, जिन्हें हाई मायोपिया हो या जिनकी आँख का दबाव अधिक रहता हो, उनमें इस बीमारी का जोखिम अधिक होता है।
नेत्र विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?
यदि हेलो दिखाई देने की समस्या आपके दैनिक जीवन जैसे वाहन चलाने, काम करने, स्कूल/कॉलेज जाने या घरेलू कार्यों में बाधा डालने लगी है, तो आपको नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। आप Sohana Hospital के नेत्र विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं और हेलो से मुक्त स्पष्ट दृष्टि की ओर अपना सफर शुरू कर सकते हैं।
Sohana Hospital में 15 अनुभवी नेत्र विशेषज्ञों की टीम है, जिन्हें नेत्र विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में विशेषज्ञता प्राप्त है। चाहे हेलो का कारण रिफ्रैक्टिव एरर हो, कॉर्निया से जुड़ी बीमारी, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या कोई अन्य नेत्र रोग—आप निश्चिंत रहें, यहाँ के अनुभवी विशेषज्ञ आपकी समस्या का सही कारण पहचानकर आपकी आवश्यकता के अनुसार उचित मार्गदर्शन और समय पर उपचार प्रदान करेंगे। आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएँ, अत्याधुनिक उपचार तकनीक, उच्च गुणवत्ता वाली रोगी देखभाल और किफायती उपचार लागत Sohana Hospital को ट्राइसिटी के प्रमुख नेत्र अस्पतालों में से एक बनाती हैं।
क्या हेलो आपकी दृष्टि में बाधा बन रहे हैं? समय पर जाँच और उपचार आपकी आँखों की रोशनी बचा सकता है!