*Read in English: Can Glaucoma and Cataracts Occur Together?
काला मोतिया (ग्लूकोमा) और मोतियाबिंद दोनों ही सामान्य आंखों की बीमारियां हैं जो बढ़ती उम्र के साथ अधिक देखी जाती हैं। और हां, यह पूरी तरह संभव है कि किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा और मोतियाबिंद दोनों एक साथ हों। दोनों अलग-अलग आंखों की समस्याएं हैं, लेकिन ये 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती हैं। हालांकि इन बीमारियों की कोई निश्चित उम्र नहीं है, फिर भी ये अक्सर बुजुर्गों में पाई जाती हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मोतियाबिंद और ग्लूकोमा दोनों ही गंभीर आंखों की बीमारियां हैं जो दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि मोतियाबिंद के कारण होने वाली दृष्टि हानि को सर्जरी द्वारा ठीक किया जा सकता है। लेकिन ग्लूकोमा के कारण होने वाली दृष्टि हानि वर्तमान में अपरिवर्तनीय (irreversible) है।
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Toggleमोतियाबिंद क्या है?
मोतियाबिंद एक आंखों की बीमारी है जिसमें आंख का प्राकृतिक रूप से साफ लेंस धुंधला (opaque) हो जाता है। यह उम्र से संबंधित एक सामान्य समस्या है और बुजुर्गों में बहुत अधिक देखी जाती है। मोतियाबिंद के कारण व्यक्ति को धुंधली और अस्पष्ट दृष्टि होती है, और यह अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है।
मोतियाबिंद के शुरुआती चरण में दृष्टि की स्पष्टता कम होने लगती है। मरीज को रात में गाड़ी चलाने में कठिनाई होती है क्योंकि नाइट विजन भी प्रभावित होता है। जैसे-जैसे लेंस अधिक धुंधला होता जाता है, रंग फीके, पीले या धुंधले दिखाई देने लगते हैं। चश्मे का नंबर भी बार-बार बदल सकता है। आंखों के विशेषज्ञ विभिन्न परीक्षणों के माध्यम से मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण पहचान सकते हैं।
मोतियाबिंद के सामान्य लक्षण:
- धुंधली या अस्पष्ट दृष्टि
- रात में देखने की क्षमता कम होना
- रात में ड्राइविंग में कठिनाई
- रंगों का फीका या पीला दिखाई देना
- रोशनी और चमक के प्रति संवेदनशीलता
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
- एक आंख में डबल दिखाई देना
मोतियाबिंद क्यों होता है?
मोतियाबिंद तब बनता है जब आंख के लेंस में मौजूद प्रोटीन और फाइबर टूटकर आपस में चिपक जाते हैं, जिससे लेंस धुंधला हो जाता है और दृष्टि धुंधली हो जाती है।
मोतियाबिंद के सामान्य कारण:
- बढ़ती उम्र (सबसे सामान्य कारण)
- सूर्य की UV किरणों का प्रभाव
- धूम्रपान
- अत्यधिक शराब सेवन
- डायबिटीज
- आंखों में चोट
- लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग
- रेडिएशन
काला मोतिया (ग्लूकोमा) क्या है?
काला मोतिया (ग्लूकोमा) आंखों की बीमारियों का एक समूह है जो धीरे-धीरे दृष्टि को प्रभावित करता है और अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है। इसमें दृष्टि हानि ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचने के कारण होती है। यह तब होता है जब आंख के अंदर का दबाव (इंट्राऑक्युलर प्रेशर) बढ़ जाता है और आंख के पीछे की नसों को नुकसान पहुंचाता है।
कई लोगों में ग्लूकोमा धीरे-धीरे और बिना दर्द के विकसित होता है। यही कारण है कि यह अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक नियमित आंखों की जांच न कराई जाए।
आपका नेत्र विशेषज्ञ आपकी आंखों की संपूर्ण जांच करेगा, जिसमें ऑप्टिक नर्व, दृष्टि क्षेत्र (visual field) और आंख का दबाव जांचा जाता है। इससे ग्लूकोमा के शुरुआती लक्षणों का पता लगाया जा सकता है – जिसे “दृष्टि का मूक चोर” भी कहा जाता है।
काला मोतिया (ग्लूकोमा) के सामान्य लक्षण:
- साइड (परिधीय) दृष्टि का धीरे-धीरे कम होना
- रोशनी के चारों ओर हलो दिखाई देना
- धुंधली दृष्टि
- बार-बार सिरदर्द
- आंखों में दर्द
- आंखों में तनाव
- आंखों में लालिमा
- मतली या उल्टी (आंखों के दर्द के साथ)
काला मोतिया (ग्लूकोमा) क्यों होता है?
ग्लूकोमा आंख में तरल पदार्थ के जमा होने से होने वाले दबाव बढ़ने के कारण होता है। इससे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है और दृष्टि हानि होती है।
तरल पदार्थ विभिन्न कारणों से जमा हो सकता है, जैसे:
- आंख की ड्रेनेज प्रणाली का ठीक से काम न करना
- अचानक ब्लॉकेज
- ऑप्टिक नर्व में रक्त प्रवाह की कमी
काला मोतिया (ग्लूकोमा) के सामान्य कारण:
- 60 वर्ष से अधिक उम्र
- आंखों में चोट
- पारिवारिक इतिहास
- डायबिटीज
- लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग
- हाई मायोपिया (नजदीक की दृष्टि दोष)
- हाई ब्लड प्रेशर
काला मोतिया (ग्लूकोमा) और मोतियाबिंद में मुख्य अंतर क्या है?
दोनों आंखों की बीमारियों में मुख्य अंतर उनके कारणों में है।
- मोतियाबिंद आंख के लेंस में प्रोटीन के जमा होने के कारण होता है।
- ग्लूकोमा आंख में तरल पदार्थ के जमा होने और दबाव बढ़ने के कारण होता है।
काला मोतिया (ग्लूकोमा) और मोतियाबिंद के लक्षण
काला मोतिया (ग्लूकोमा) के लक्षण:
- परिधीय दृष्टि का कम होना
- रोशनी के चारों ओर हलो
- धुंधली दृष्टि
- सिरदर्द
- आंखों में दर्द या तनाव
- आंखों में लालिमा
- मतली (आंखों के दर्द के साथ)
मोतियाबिंद के लक्षण:
- धुंधली दृष्टि
- रात में कम दिखाई देना
- रात में ड्राइविंग में कठिनाई
- रंग फीके दिखना
- रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
- एक आंख में डबल दिखाई देना
क्या मोतियाबिंद और काला मोतिया (ग्लूकोमा) आपस में जुड़े हैं?
एक व्यक्ति को एक साथ मोतियाबिंद और ग्लूकोमा दोनों हो सकते हैं। कभी-कभी एक बीमारी दूसरी को जन्म दे सकती है।
उदाहरण के लिए, यदि मोतियाबिंद बहुत बढ़ जाता है तो यह आंख की प्राकृतिक ड्रेनेज प्रणाली को ब्लॉक कर सकता है। मोतियाबिंद सर्जरी से इस अवरोध को हटाया जा सकता है, जिससे आंख का दबाव कम होता है और ऑप्टिक नर्व पर दबाव घटता है।
इसी तरह, ग्लूकोमा की सर्जरी के बाद मोतियाबिंद बनने की संभावना भी होती है। कुछ विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ग्लूकोमा सर्जरी के बाद कम से कम एक साल का इंतजार करना चाहिए ताकि आंख स्थिर और स्वस्थ हो जाए, उसके बाद ही मोतियाबिंद की सर्जरी करवाई जाए।
मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) और मोतियाबिंद का उपचार
ग्लूकोमा का उपचार
दवाइयां: आई ड्रॉप्स और मौखिक दवाइयां पहला उपचार होता है।
लेजर उपचार: इसमें आंख की ड्रेनेज ट्यूब को खोलना या तरल उत्पादन कम करना शामिल है।
उपचार के प्रकार:
- सिलेक्टिव लेजर ट्रैबेकुलोप्लास्टी (SLT)
- YAG लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी (PI)
- साइक्लोफोटोकोएगुलेशन
सर्जरी:
- ट्रैबेकुलेक्टॉमी
- ग्लूकोमा ड्रेनेज डिवाइस (GDDs)
- मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (MIGS)
मोतियाबिंद का उपचार
आधुनिक मोतियाबिंद सर्जरी सुरक्षित, कम दर्द वाली और बिना टांकों वाली होती है।
उपचार के प्रकार:
- MICS (माइक्रो-इंसीजन कैटरेक्ट सर्जरी)
- FLACS (फेम्टोसेकंड लेजर असिस्टेड कैटरेक्ट सर्जरी)
- रोबोटिक AI कैटरेक्ट सर्जरी
सर्जरी के बाद कृत्रिम लेंस लगाए जाते हैं जिससे जीवनभर साफ दृष्टि मिल सकती है।
आपको नेत्र विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?
आदर्श रूप से आपको हर साल आंखों की जांच करानी चाहिए। खासकर यदि आप जोखिम समूह में आते हैं। यदि आपको दृष्टि में कोई बदलाव महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
तुरंत डॉक्टर से मिलने की स्थिति:
- धुंधली दृष्टि
- आंखों में लालिमा
- तेज दर्द
- रोशनी के चारों ओर हलो
- डबल दिखाई देना
- मतली या उल्टी (आंखों के दर्द के साथ)
क्यों चुनें सोहाना आई हॉस्पिटल?
सोहाना आई हॉस्पिटल उत्तर भारत के प्रमुख नेत्र संस्थानों में से एक है। यहां अनुभवी डॉक्टर, अत्याधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाएं उपलब्ध हैं। यह अस्पताल 30 वर्षों से अधिक समय से सेवा दे रहा है और हर साल 10,000 से अधिक सफल सर्जरी करता है। यहां मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, रेटिना, कॉर्निया, लेजर सर्जरी और बच्चों की आंखों का इलाज उपलब्ध है।
पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या काला मोतिया (ग्लूकोमा) और मोतियाबिंद एक ही हैं?
नहीं। ग्लूकोमा ऑप्टिक नर्व से जुड़ी बीमारी है, जबकि मोतियाबिंद आंख के लेंस का धुंधलापन है। दोनों अलग-अलग बीमारियां हैं।
2. क्या मोतियाबिंद सर्जरी के बाद काला मोतिया (ग्लूकोमा) हो सकता है?
हां, लेकिन यह दुर्लभ है। कुछ मामलों में आंख का दबाव प्रभावित हो सकता है। बच्चों में इसका जोखिम अधिक होता है।
3. क्या मोतियाबिंद से काला मोतिया (ग्लूकोमा) हो सकता है?
हां, उन्नत अवस्था में मोतियाबिंद आंख का दबाव बढ़ा सकता है, जिससे ग्लूकोमा हो सकता है।